सायनस एक कफ जनित रोग है हमारे शरीर में कफ विकृत हो जाने पर पेट से ये वक्ष स्थल की ओर बढने लगता है और तब रोगी को खांसी, जुकाम जल्दी जल्दी होने लगता है यदि उसी समय उसका उपचार कर लिया जाये तो उचित है क्यूंकि बाद में काफी समस्या उठानी पड़ती है |
कारण ( cause ) -
* वायु विकार सायनस रोग के होने का सबसे पहला कारण है क्युकि कफ कुपित होने से पहले वायु कुपित हो कर इस रोग की आधार शिला रखती है |
* वायु के कुपित होने के बाद कफ विकृत हो जाता है और इसका मुख्य कारण बनता है |
* बाहरी वायरस और बेक्टेरिया के आक्रमण से भी ये रोग हो सकता है |
* धुम्रपान करने वाले व्यक्ति के पास खड़े होने से भी इस रोग के होने की सम्भाबना हो सकती है |
* बार - बार जलवायु का परिवर्तित होना |
लक्षण (symptoms )-
* सर में दोनों भौ के वीच में या दोनों के ऊपर दर्द रहना |
* आँखों में दर्द होना |
* छिके ज्यादा आना |
* शिरीर का तापमान जल्दी जल्दी बदलना |
* चेहरे पर खिचाब रहना |
उपचार (Treatment)-
* बच के बीज लेकर उन्हें पीस कर बारीक चूर्ण बना ले अब इसे कागज के टुकड़े पर रख कर नीचे से जलाये और इससे निकलने वाले धुएं का पान करें |
* कमल गट्टा और गुग्गुल को बारीक पीस कर चूर्ण बना लें अब इस चूर्ण को सुबह शाम एक एक चम्मच गुनगुने पानी से लें |
* लहसुन और प्याज दोनों को छिल कर धुप में बिना रखे सुखा लें और चूर्ण बना लें और गुनगुने ढूध के साथ लें
* रोज सुबह खाली पेट आवला पाउडर का नित्य सेवन करें |
कारण ( cause ) -
* वायु विकार सायनस रोग के होने का सबसे पहला कारण है क्युकि कफ कुपित होने से पहले वायु कुपित हो कर इस रोग की आधार शिला रखती है |
* वायु के कुपित होने के बाद कफ विकृत हो जाता है और इसका मुख्य कारण बनता है |
* बाहरी वायरस और बेक्टेरिया के आक्रमण से भी ये रोग हो सकता है |
* धुम्रपान करने वाले व्यक्ति के पास खड़े होने से भी इस रोग के होने की सम्भाबना हो सकती है |
* बार - बार जलवायु का परिवर्तित होना |
लक्षण (symptoms )-
* सर में दोनों भौ के वीच में या दोनों के ऊपर दर्द रहना |
* आँखों में दर्द होना |
* छिके ज्यादा आना |
* शिरीर का तापमान जल्दी जल्दी बदलना |
* चेहरे पर खिचाब रहना |
उपचार (Treatment)-
* बच के बीज लेकर उन्हें पीस कर बारीक चूर्ण बना ले अब इसे कागज के टुकड़े पर रख कर नीचे से जलाये और इससे निकलने वाले धुएं का पान करें |
* कमल गट्टा और गुग्गुल को बारीक पीस कर चूर्ण बना लें अब इस चूर्ण को सुबह शाम एक एक चम्मच गुनगुने पानी से लें |
* लहसुन और प्याज दोनों को छिल कर धुप में बिना रखे सुखा लें और चूर्ण बना लें और गुनगुने ढूध के साथ लें
* रोज सुबह खाली पेट आवला पाउडर का नित्य सेवन करें |
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