मिर्गी का दौरा -
मिर्गी कोई रोग नहीं बल्कि मस्तिष्क में होने वाले रोग का एक लक्षण है मिर्गी का अर्थ है की रोगी के मस्तिष्क में कोई केमिकल असंतुलन हो रहा है जब शरीर में स्थित विजातिये द्रव्य अर्थात टोक्सिन मस्तिष्क में पहुँच कर वहा की कोशिकयो को कमजोर कर देता है केंद्रीय स्नायु से सम्बन्धित ये रोग अनियमित दिनचर्या, मस्तिष्क कोशिकायो के कमजोर होने, अनिद्रा, खान पान में विषमता, या मस्तिष्क में चोट लगता इत्यादि भी इसके कारण हो सकते है ये रोग अधिकांशत: वायु या पित्त के कुपित होने के कारण होता है |
मिर्गी के बारे में कुछ तथ्य जान लेने जरुरी जैसे कि -
* ये आवश्यक नहीं कि मिर्गी रोगी के मस्तिष्क में विकृति स्थायी हो ये कुछ समय की मानसिक तरंगो के व्यावघान के कारण भी हो सकता है |
* मिर्गी का रोगी मानसिक रूप से कमजोर हो ये जरुरी नहीं है |
* ऐसा रोगी गुस्से वाला हो ये भी आवश्यक नहीं |
* मिर्गी होने का एक कारण अनुवांशिक भी होता है किन्तु कुशल वैध के उपचार से इसे सही किया जा सकता है |
उपाय -
* मिर्गी के रोगी को प्राय कुछ आवेग नहीं रोकने चाहिए जैसे की भूक को रोकना नहीं है, मल का त्याग समय पर करें , प्यास को रोकना नहीं चाहिए, नींद को समय पे लेना चाहिए, अत्याथिक काम बिना विश्राम के नहीं करना चाहिए|
* मिर्गी के रोगी का नाफी चक्र संतुलित रहे, यह अत्यंत आवश्यक है| अगर नाभि चक्र ठीक रहे तो लाफ मिल जायेगा |
* सोने, चांदी तथा ताँबे का जल भी मिर्गी को नियत्रित कर सकता है| इसे बनाने का तारिका इस प्रकार है:
२४ ग्राम सोना( सोने का कोई जेवर भी काम में लिया जा सकता है जिसमे कोई मीना न हो ) 30 ग्राम चाँदी 60 ग्राम तांबा, 4 गिलास पानी में डालकर पानी को उबाले और जब 2 गिलास बाच जाये तो उस पानी का सेवन नित्य करना है रोजाना पानी बनाना है और रोज पीना है तथा खट्टी चीजों का सेवन वर्जित है |
मिर्गी कोई रोग नहीं बल्कि मस्तिष्क में होने वाले रोग का एक लक्षण है मिर्गी का अर्थ है की रोगी के मस्तिष्क में कोई केमिकल असंतुलन हो रहा है जब शरीर में स्थित विजातिये द्रव्य अर्थात टोक्सिन मस्तिष्क में पहुँच कर वहा की कोशिकयो को कमजोर कर देता है केंद्रीय स्नायु से सम्बन्धित ये रोग अनियमित दिनचर्या, मस्तिष्क कोशिकायो के कमजोर होने, अनिद्रा, खान पान में विषमता, या मस्तिष्क में चोट लगता इत्यादि भी इसके कारण हो सकते है ये रोग अधिकांशत: वायु या पित्त के कुपित होने के कारण होता है |
मिर्गी के बारे में कुछ तथ्य जान लेने जरुरी जैसे कि -
* ये आवश्यक नहीं कि मिर्गी रोगी के मस्तिष्क में विकृति स्थायी हो ये कुछ समय की मानसिक तरंगो के व्यावघान के कारण भी हो सकता है |
* मिर्गी का रोगी मानसिक रूप से कमजोर हो ये जरुरी नहीं है |
* ऐसा रोगी गुस्से वाला हो ये भी आवश्यक नहीं |
* मिर्गी होने का एक कारण अनुवांशिक भी होता है किन्तु कुशल वैध के उपचार से इसे सही किया जा सकता है |
उपाय -
* मिर्गी के रोगी को प्राय कुछ आवेग नहीं रोकने चाहिए जैसे की भूक को रोकना नहीं है, मल का त्याग समय पर करें , प्यास को रोकना नहीं चाहिए, नींद को समय पे लेना चाहिए, अत्याथिक काम बिना विश्राम के नहीं करना चाहिए|
* मिर्गी के रोगी का नाफी चक्र संतुलित रहे, यह अत्यंत आवश्यक है| अगर नाभि चक्र ठीक रहे तो लाफ मिल जायेगा |
* सोने, चांदी तथा ताँबे का जल भी मिर्गी को नियत्रित कर सकता है| इसे बनाने का तारिका इस प्रकार है:
२४ ग्राम सोना( सोने का कोई जेवर भी काम में लिया जा सकता है जिसमे कोई मीना न हो ) 30 ग्राम चाँदी 60 ग्राम तांबा, 4 गिलास पानी में डालकर पानी को उबाले और जब 2 गिलास बाच जाये तो उस पानी का सेवन नित्य करना है रोजाना पानी बनाना है और रोज पीना है तथा खट्टी चीजों का सेवन वर्जित है |
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