स्त्री रोग मासिक धर्म ( mensuration cycle ) -
मासिक धर्म स्त्रियों में होने वाली एक प्राकृतिक क्रिया होती है इसके होने का एक निश्चित समय होता है प्रतेक माह 20 से 25 दिन बाद ये क्रिया होती है और 5 से 7 दिन तक चलती है |

मासिक धर्म होता क्यों है ?-
लगभग 10 से 15 वर्ष की अवस्था के पर ये क्रिया स्त्रियों में आरम्भ हो जाती है अण्डाशय में बनने वाले अंडे बनने के बाद गर्भाशय में आने लगते है और जब गर्भाशय में इनकी संख्या अधिक हो जाती है तब ये योनी मार्ग से होते हुये बाहर निकल जाते है यदि इन अन्डो को fertilization के लिए कोई शुक्राणु मिल जाता है तो ये क्रिया बंद हो जाती है |
 जब तक स्त्री में मासिक धर्म की क्रिया होती रहती है तब तक उनमे संतान उत्पत्ति की क्षमता रहती है इसके विपरीत ये योग्यता नहीं रहती |

इसमें क्या है रोग ?
 मासिक धर्म के अनियमित होना, मासिक धर्म के दौरान अत्यधिक दर्द होना, मासिक धर्म का जल्दी बंद हो जाना या अधिक आना, पेट में अत्यधिक दर्द होना ये रोग पाये जाते है |
जिनके गर्भाशय में अधिक रक्त जमा हो जाता है उनकी पेशियों में शिथिलता आने लगती है और गर्भाशय में ट्यूमर या केंसर होने की सम्भावना हो जाती है और ह्रदय रोग, पंडू रोग लीवर में इन्फेक्शन जैसी समस्या उत्पन्न सकती है |

लक्षण -

 शुरुवात में इस रोग को अधिकाशं महिलाये उपेक्षित कर देती है किन्तु जब ये रोग अधिक बढ़ जाता है तब महिलायों को अधिक कठनाई करना पड़ता है  |
* रोगी का चेहरा सफ़ेद पड़ जाता है खून की कमी होने लगती है |
* रोग के आरम्भ में पेट में दर्द, कमर में दर्द , पेडू में दर्द होना या भारीपन , तनाव रहना , सर में भारीपन, योनी द्वार पर खुजली, पेशाब में जलन होना, पेशाब में दर्द होना, चक्कर आना इत्यादि इसके मुख्या लक्षण है |
इन सभी लक्षणों के बाद योनी द्वार से सफ़ेद पतला पदार्थ थोडा थोडा निकने लगता है ये धीरे - घीरे गाडा होने लगता है और अत्यधिक बदबू आती है |

कारण -
सामान्यत इस रोग का कारण वात,पित्त और कफ होता है इसलिए आप स्वयं इसकी चिकित्सा न करें क्यूँकि उपचार से पहले ये जानना आवश्यक है कि ये रोग किस विकार के कुपित होने से हुआ है |
वात जनित रोग के लक्षण -
वात जनित इस रोग में प्रदर गाड़े लाल रंग का होता है तथा इसमे मांस के छोटे - छोटे टुकड़े भी निकलते है तथा अत्यधिक दर्द होता है |
पित्त जनित रोग -ऐसे में प्रदर लाल, काला, नीला अथवा पीला हो सकता है हल्का सा बुखार भी रहता है कभी - कभी प्यास तथा भ्रम जैसी स्थिति लगती है
कफ जनित -
इसमें प्रदर सफ़ेद या हल्का पीला होता है उलटिया, सिर दर्द खाँसी इत्यादि इसके लक्षण है |

संधिपात -
जिस रोगी में प्रदर रोग तीनो कारणों से होता है और तीनो दोषों के प्रकट होते है उन्हें संधिपात जनित प्रदर रोग कहते है |

उपचार -
बरगद का दूध में बबूल के छाया में सूखा ले फिर कूट पीस कर चूर्ण बना ले और इसमें समभाग मिश्री मिला लें एक - एक चम्मच चूर्ण दूघ के साथ ले सम्भाबित  60 दिन में रोग ठीक हो जायेगा |
दारू हल्दी, रसोत, अन्दुसा, नागरमोथा, चिरायता, बेलगिरी,भिलावा तथा कमोदिनी इनको समभाग 6 - 6 ग्राम लेकर 100 ग्राम जल में क्वाथ बना ले शीतल होने पर छान कर 25 ग्राम शहद मिलाये और पी लें |
मुलहेठी के चूर्ण में दो गुनी मिश्री मिलाकर प्रात : खाली पेट 4 चम्मच चूर्ण पानी के साथ ले तथा उसके ऊपर 10 से 15 बूँद चुने के पानी की ले  ये पानी दिन में 10 बार लें |


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