लयूकोरेया -
इसको सफेद पानी के नाम से भी जाना जाता है मुख्या रूप से कहा जाता है की ये योनी में इन्फेक्शन के कारण होता है इस रोग में रोगी की योनी से सफ़ेद पानी जोकि लसलसा गोंद जैसा होता है निकलता रहता है लेकिन आयुर्वेद में महिलायों के इस रोग को प्रदर रोग बताया गया है जिसमे जब प्रदर रोग कफ जनित होता है तो योनी से निकलने वाला पानी सफ़ेद या गोंद जैसा लसलसा गाडा द्रब्य निकलता है जिसे लयूकोरेया के नाम से जानते है |

कारण -
इस रोग का कारण कफ का कुपित होना इसका मुख्य कारण होता है जो रोगी मानसिक तनाव, आरामदेह जीवन यापन, अनुचित खान - पान रखते है उनका कफ कुपित हो जाता है |
अत्यधिक मैथुन, असुरक्षित योन सम्बन्ध, या पराये पुरुष या साथी से सम्भोग करने से भी योनी में इन्फेक्शन हो जाता है और ये भी एक लयूकोरेया होने का कारण बनता है |

लक्षण -
सामान्यत : यदि इस रोग का पता यदि शुरू में चल जाये तो इस रोग को बड़ी आसानी से ठीक किया जा सकता है लेकिन आमतौर पर इस रोग के बढ़ जाने के बाद ही इस रोग का पता चलता है |
इस रोग में शुरू में रोगी का को योनी द्वार पर गीला - गीला सा महसूस होता है और हलकी बदबू भी आती है शरीर टूटता है किसी काम में मन नहीं लगता है |
ये इसके प्रारंभिक लक्षण होते है बाद में जैसे जैसे ये रोग बढता जाता है तो पानी अधिक मात्रा में और गाढ़ा अधिक बदबूदार हो जाता है शरीर में दर्द, कमर में दर्द, गर्दन में दर्द, बुखार शरीर का टूटना हाथ पैर में जलन या आग सी निकलती है इस प्रकार के लक्षण पाये जाते है |

उपचार -
* वंशलोचन, नागकेशर, तथा सुगंधवाला, इन सभी तत्वों को समभाग में लेकर चूर्ण बना लें और इस चूर्ण को चावल की मांड के साथ पिलाने से ये रोग नष्ट हो जाता है |
*आम  के पेड़ की छाल, पीपल की छाल, जामुन की छाल, बरगद की छाल, बबूल की छाल प्रत्येक को समभाग में मिलाकर चूर्ण बना लें फिर इसका क्वाथ बना कर इसके क्वाथ में मिश्री मिला के और फिर पका लें जब इसमें तार बन जाये फिर इसमें मुलहेटी  मिलाकर सुबह शाम लें |
* अशोक घनसाल, लाल चन्दन सुपारी का फूल तीनो को मिलाकर इनकी भस्म बना लें और फिर इसमें शीतल चीनी मिलाकर चावल की मांड के साथ सुबह शाम लें |


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