आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथो के अनुसार किसी मनुष्य में होने वाले सभी रोगों का प्रमुख कारण वात, पित्त और कफ होता है जिसमे सबसे मुख्य और बड़ा कारण वात को माना गया है तो आईये जानते हैं वात क्या है ? वात बिगड़ने के कारण और लक्षण (what is vaat ? cause and symptoms of vaat rog)

वात क्या है ? वात बिगड़ने के कारण और लक्षण (what is vaat ? cause and symptoms of vaat rog)
वात अर्थात वायु का निवास स्थान पेट में स्थित छोटी आंत (small intestine) का आगे वाला हिस्सा जिसको पक्वाशय (duodenum) कहते है में होता है वात अर्थात वायु के विकार यही से शुरू होकर पूरे शरीर में फ़ैल जाता है और विभिन्न प्रकार के रोगों को जन्म देता है ये वात या वायु विकार को निम्न भागो में बांटा गया है -
- उदान वायु - उदान वायु कंठ में वास करती है जैसे डकार आना |
- अपान वायु - बड़ी आंत से मलाशय तक |
- प्राण वायु - प्राण वायु ह्रदय के ऊपरी भाग में |
- व्यान वायु - पूरे शरीर में फैली होती है |
- समान वायु - समान वायु का स्थान अमाशय और बड़ी आंत में होता है |
वात या वायु विकार किस प्रकार का है यह ज्ञात न होने के कारण इसकी चिकित्सा पूर्ण रूप से सम्भव नहीं हो पाती यदि योग्य चिकित्सक हो तो इसकी पहचान कर सही तरीके से इसका इलाज कर इस रोग से आपको मुक्ति दे सकता है एलोपैथी में इसकी पूर्ण चिकित्सा सम्भव नहीं है इसका पूर्ण इलाज केवल आयुर्वेद में ही सम्भव है
वात रोग की पहचान और लक्षण (identification and symptoms)-
वात रोग या वायु विकार हो जाने पर मॉस पेशियों में खिचाव, दर्द, रीढ़ की हड्डी में दर्द होना सर में दर्द, मायग्रेन, गर्दन में दर्द, घुटनों में दर्द, हड्डियों में दर्द, जोड़ो में दर्द, छाती के बीच में दर्द, जोड़ो का फूलना, पेट का फूलना, मूत्र रोग जैसे पेशाब में जलन यूरिक एसिड का बढ़ जाना, डकारे ज्यादा आना, त्वचा का रूखा होना, वार वार मुंह का सूखना, प्यास अधिक लगना इत्यादि वात या वायु विकार के मुख्य लक्षण है
वात रोग होने के कारण - (reasons of vaat rog)-
वात रोग होने का मुख्य कारण अपच या भोजन का ठीक से ना पचना होता है जिसकी बजह गरिस्थ भोजन (oily or junk food), दूषित भोजन जैसे रात का रखा हुआ, ठीक से न पका होना, सफाई से न पकाना इत्यादि ,खाना खाने के तुरंत बाद पानी पीना, ठंडा पानी पीना, दूषित पानी पीना, व्यायाम ना करना, देर तक सोना, मदिरा या शराब का सेवन करना, मांस खाना इत्यादि वायु विकार होने के मुख्य कारण है
कैसे पाये इस रोग से मुक्ति ? (how cure vaat rog)-
- सर्व प्रथम अपनी दिनचर्या को बदले रात को जल्दी सोना और सुबह जल्दी उठने की आदत डाले |
- सुपाच्य और हल्का भोजन करें |
- प्रतिदिन सुबह योग और व्यायाम की आदत डाले |
- भोजन के तुरंत बाद पानी ना पीये, भोजन के 1 घंटा 45 मिनट बाद ही पानी पीये तथा भोजन से १/२ घंटे पहले तक ही पानी पीये खाना खाने के साथ पानी पी सकते है |
- रोज सुबह खाली पेट ग्वार का पाठा (alovera) का रस निकाल कर पीये |
- सुबह खाली पेट नीम गिलोय का रस पीये |
- आंवला सुखा कर कूट पीस कर उसका चूर्ण बना ले और नित्य सुबह उठ कर एक चम्मच खाली पेट ले |
- लहसुन को सूखा कर उसका चूर्ण बना ले हफ्ते में तीन दिन उसका सेवन करें |
- गुडहल के फूल का चूर्ण बना कर उसकी चाय बना कर पीने से वात, पित्त और कफ दोनों सामान्य हो जाते है
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Motiyabind kid dosh KE karan Se hota hai please reply
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