सायटिका (siatica)का आयुर्वेदिक उपचार -
सायटिका एक वातजनित रोग होता है इसे हिंदी में ग्रध्रसी रोग कहते है सायटिका नर्व पर दबाब होने के कारण इसको सायटिका कहते है| इसमें रोगी झुककर कभी सीधे और कभी उचक कर चलता है| इसमें रीड की हडी के निचले भाग से एक पैर में एडी तक तरंग युक्त दर्द होता है| रोग की गंभीरता में दर्द बिजली के करंट लगने जैसा होता है| इसमें रोगी न ढंग से चल पता है न आराम कर पाता है| रोगी हर समय बेचैन रहता है|

रोग के कारण(causes of siatica)-
लगभग १० में से ६ रोगियों को यह रोग अधीक वजन उठाने, चोट लगने, रीड की हडी असामान्य अवस्था में हो जाने तथा रीड की हडी की स्लिप डिस्क हो जाने के कारण होता है जिससे शुरुवात में कमर में दर्द होता है| बाकि के १० में से ४ रोगियों में यह वातजनित प्रकोप होता है| जो लोग चाय अधीक पीते है रुक्ष गरीस्थ भोजन करने , रात्रि जागरण, चार पहिया या दो पहिया वाहन अधीक चलाने से, धातु क्षय जनित दुर्बलता आदि से वातरिक्त स्थानों में अवरोध कर देती है जिसके फलस्वरुप यह रोग होता है|


उपाय(treatment)-
वातजनित रोगियों के लिए निम्न ओषधि उपयोगी है|
* शुद्ध कुचला में सोठ मिलाकार सुबह शाम गरम दूध से ले|
* चोप चीनी, अश्वगंधा, सोठ इन तीनो को मिलाकर कपडछंद चूर्ण बना ले और इसको घी और गूड से खाए अवश्य लाभ मिलेगा|
* रोज शाम के समय सनाह शहद से ले तथा प्रत्येक सुबह त्रिफला चूर्ण शहद के साथ खाली पेट ले|

 नोट: जिन रोगियों को यह रोग वातजनित नहीं है उन्हें किसी कुशल फ़िज़ियोथेरेपिस्ट से फिजियो थेरेपी करानी चाहिए|

परहेज़- दही, चावल, शीतल जल, खाली पेट पानी और चीनी का शर्बत से परहेज़ रखे|
* चार पहिया और दो पहिया वाहन कम चलाये |
* अधीक वजन न उठाये |
* रात को सोते वक़्त जिस पैर में दर्द हे उसे हल्का सा बांध कर सोये|


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