क्या है मूत्र मार्ग में संक्रमण ?
किडनी का काम होता है ब्लड में से पानी को फ़िल्टर कर उसमे होने वाले हानिकारक तत्वों को मूत्र के माध्यम से बाहर निकाल देना इस पूरी प्रक्रिया में तीन पार्ट काम करते है kidney, Ureters, bladder इन तीनो में से किसी एक में भी अगर इन्फेक्शन हो जाए तो मूत्र मार्ग अबरुद्ध हो जाता है इसी को UTI या Urinary Tract Infection कहते है |
सबसे पहले किडनी इसका काम ब्लड में से ज्यादा हो रहे पदार्थो और पानी को बहार निकाल कर उसको मूत्र के रूप में बहार निकाल कर ureters में भेज देता है ये यहाँ पर ब्लड शुगर, फॉस्फोरस, इलेक्ट्रोलाइट इत्यादि को मूत्र के माध्यम से बहार निकालती है जिससे ब्लड प्रेशर कण्ट्रोल में रहता है |
ureters को मूत्र वाहिनी कहते है ये मूत्र को ब्लैडर तक लेकर जाती है |
ब्लैडर का कार्य मूत्र को स्टोर करने का होता है जब मूत्र एक नियत मात्रा से ज्यादा हो जाता है तब इसकी muscles हमारे मष्तिष्क को संदेश भेजती है की हमे यूरिन या मूत्र आ रहा है और फिर मूत्र urethra नामक नलिका के माध्यम से बहार निकल जाता है |
UTI (Urinary tract infection) होने के कारण -
* किडनी में किसी प्रकार के इन्फेक्शन होने पर मूत्र मार्ग में संक्रमण हो सकता है |
* कभी कभी लेज़र विधि से किडनी स्टोन को बहार निकालने पर high radiation की वजह से मोटर वाहिनी में संक्रमण हो जाता है |
* मूत्र के वेग को लगत्तर रोकने पर पर भी ब्लैडर में इन्फेक्शन हो सकता है |
* ब्लड प्रेशर का लगातार बढ़ते रहना या कण्ट्रोल में न रहना |
* ब्लड शुगर लेवल का लगातार बढ़ते रहना |
* किडनी में स्टोन या ब्लैडर में स्टोन होने पर
लक्षण ( symptoms or sign of UTI infection)-
* मूत्र मार्ग में लगातार जलन होना |
* मूत्र आने पर असहनीय दर्द होना |
* अचानक से यूरिन आना फिर करने पर कम होना |
* रुक रुक से मूत्र का आना |
* पेट फूलना और यूरिन कम आना |
* हल्का हल्का बुखार रहना |
उपचार (Ayurvedic Treatment of UTI infection )-
* नीबू पानी पिए
* कोकोनट वाटर या नारियल पानी पिये |
* आवला पाउडर को एक एक चम्मच सुबह शाम ताज़ा पानी से ले |
* आंवला, हर्र, बहेड़ा तीनो को बराबर मात्रा में मिलाकर पीस कर बारीक चूर्ण बना ले फिर सुबह शाम ताज़ा पानी से इसका सेवन करे |
* नीम, गिलोय, तुलसी सभी को मिलाकर जूस बना ले और सुबह शाम इसका सेवन करे |
किडनी का काम होता है ब्लड में से पानी को फ़िल्टर कर उसमे होने वाले हानिकारक तत्वों को मूत्र के माध्यम से बाहर निकाल देना इस पूरी प्रक्रिया में तीन पार्ट काम करते है kidney, Ureters, bladder इन तीनो में से किसी एक में भी अगर इन्फेक्शन हो जाए तो मूत्र मार्ग अबरुद्ध हो जाता है इसी को UTI या Urinary Tract Infection कहते है |
सबसे पहले किडनी इसका काम ब्लड में से ज्यादा हो रहे पदार्थो और पानी को बहार निकाल कर उसको मूत्र के रूप में बहार निकाल कर ureters में भेज देता है ये यहाँ पर ब्लड शुगर, फॉस्फोरस, इलेक्ट्रोलाइट इत्यादि को मूत्र के माध्यम से बहार निकालती है जिससे ब्लड प्रेशर कण्ट्रोल में रहता है |
ureters को मूत्र वाहिनी कहते है ये मूत्र को ब्लैडर तक लेकर जाती है |
ब्लैडर का कार्य मूत्र को स्टोर करने का होता है जब मूत्र एक नियत मात्रा से ज्यादा हो जाता है तब इसकी muscles हमारे मष्तिष्क को संदेश भेजती है की हमे यूरिन या मूत्र आ रहा है और फिर मूत्र urethra नामक नलिका के माध्यम से बहार निकल जाता है |
UTI (Urinary tract infection) होने के कारण -
* किडनी में किसी प्रकार के इन्फेक्शन होने पर मूत्र मार्ग में संक्रमण हो सकता है |
* कभी कभी लेज़र विधि से किडनी स्टोन को बहार निकालने पर high radiation की वजह से मोटर वाहिनी में संक्रमण हो जाता है |
* मूत्र के वेग को लगत्तर रोकने पर पर भी ब्लैडर में इन्फेक्शन हो सकता है |
* ब्लड प्रेशर का लगातार बढ़ते रहना या कण्ट्रोल में न रहना |
* ब्लड शुगर लेवल का लगातार बढ़ते रहना |
* किडनी में स्टोन या ब्लैडर में स्टोन होने पर
लक्षण ( symptoms or sign of UTI infection)-
* मूत्र मार्ग में लगातार जलन होना |
* मूत्र आने पर असहनीय दर्द होना |
* अचानक से यूरिन आना फिर करने पर कम होना |
* रुक रुक से मूत्र का आना |
* पेट फूलना और यूरिन कम आना |
* हल्का हल्का बुखार रहना |
उपचार (Ayurvedic Treatment of UTI infection )-
* नीबू पानी पिए
* कोकोनट वाटर या नारियल पानी पिये |
* आवला पाउडर को एक एक चम्मच सुबह शाम ताज़ा पानी से ले |
* आंवला, हर्र, बहेड़ा तीनो को बराबर मात्रा में मिलाकर पीस कर बारीक चूर्ण बना ले फिर सुबह शाम ताज़ा पानी से इसका सेवन करे |
* नीम, गिलोय, तुलसी सभी को मिलाकर जूस बना ले और सुबह शाम इसका सेवन करे |
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