प्रोस्टेट ग्रंथि क्या है ?
प्रोस्टेट एक मेल ग्रंथि है जो केवल पुरुषो में पायी जाती है इसकी स्थिति bladder और penis के बीच में स्थित होती है इसका कार्य पुरुष के sperm को सुरक्षित करना तथा यूरिन को कण्ट्रोल करना होता है testis में sperm का प्रोडक्शन होता है और ejaculation के समय प्रोस्टेट के एक सफ़ेद रंग का लसलसा पदार्थ निकलता है जो की sperm को जीवित करता हुआ semen में बदल कर बहार मूत्र वाहिनी से होता हुआ बहार निकलता है |
प्रोस्टेट बढ़ने के कारण -
सामान्य रूप से प्रोस्टेट ग्रंथि में सेल का विकास 35 से 40 की उम्र में बढ़ने लगता है यदि शुद्ध खान पान न हो व्यायाम या योग न किया जाए तो ये समस्या अवश्य ही मनुष्य को परेशान करती है जिसे BPH यानि की benign prostatic hypertrophy कहते है |
लक्षण -
* मूत्र प्रवाह पर कण्ट्रोल नहीं कर पाते अचानक से यूरिन निकलने का अनुभव होता है |
* मूत्र प्रवाह बहुत धीरे धीरे होता है या कम होता है
* यूरिन करने में दर्द या जलन भी हो सकती है |
* मूत्र का त्याग करने के बाद भी मूत्र बूँद बूँद निकलता रहता है |
* सम्भोग के समय वीर्य निकलने में दर्द होना |
जांच (test)-
इसकी जांच अल्ट्रासाउंड transrectal पोजीशन में करने पर पता लग सकता है
PSA (prostatic specific antigen ) इसकी जांच ब्लड से होती है इसके बढ़ जाने और रेगुलर ज्यादा रहने पर प्रोस्टेट केंसर होने की सम्भावना रहती है |
आयुर्वेदिक उपचार (ayurvedic treatment)-
* मंडूक योगा प्रतिदिन करें |
* मैडिटेशन का अभ्यास दिन में 30 मिनट तक करें |
* नारियल का पानी रोगी की स्थिति के अनुसार मात्रा में नियमित दे |
* आंवला, हर्र, बहेड़ा, तीनो को बराबर मात्रा में पीस कर इसको पानी में उबाल कर फिर पानी छान कर पी लें |
* नीबू पानी दिन में दो बार पिये |
* टमाटर का जूस, गाजर का जूस, चुकंदर का जूस, सेव का और मौसमी का जूस इनका सेवन करे |
* कद्दू या सीता फल के बीज को निकाल कर पेड़ के नीचे सुखा लें फिर पीस कर बारीक चूर्ण बना लें और सुबह शाम सेवन करें |
प्रोस्टेट एक मेल ग्रंथि है जो केवल पुरुषो में पायी जाती है इसकी स्थिति bladder और penis के बीच में स्थित होती है इसका कार्य पुरुष के sperm को सुरक्षित करना तथा यूरिन को कण्ट्रोल करना होता है testis में sperm का प्रोडक्शन होता है और ejaculation के समय प्रोस्टेट के एक सफ़ेद रंग का लसलसा पदार्थ निकलता है जो की sperm को जीवित करता हुआ semen में बदल कर बहार मूत्र वाहिनी से होता हुआ बहार निकलता है |
प्रोस्टेट बढ़ने के कारण -
सामान्य रूप से प्रोस्टेट ग्रंथि में सेल का विकास 35 से 40 की उम्र में बढ़ने लगता है यदि शुद्ध खान पान न हो व्यायाम या योग न किया जाए तो ये समस्या अवश्य ही मनुष्य को परेशान करती है जिसे BPH यानि की benign prostatic hypertrophy कहते है |
लक्षण -
* मूत्र प्रवाह पर कण्ट्रोल नहीं कर पाते अचानक से यूरिन निकलने का अनुभव होता है |
* मूत्र प्रवाह बहुत धीरे धीरे होता है या कम होता है
* यूरिन करने में दर्द या जलन भी हो सकती है |
* मूत्र का त्याग करने के बाद भी मूत्र बूँद बूँद निकलता रहता है |
* सम्भोग के समय वीर्य निकलने में दर्द होना |
जांच (test)-
इसकी जांच अल्ट्रासाउंड transrectal पोजीशन में करने पर पता लग सकता है
PSA (prostatic specific antigen ) इसकी जांच ब्लड से होती है इसके बढ़ जाने और रेगुलर ज्यादा रहने पर प्रोस्टेट केंसर होने की सम्भावना रहती है |
आयुर्वेदिक उपचार (ayurvedic treatment)-
* मंडूक योगा प्रतिदिन करें |
* मैडिटेशन का अभ्यास दिन में 30 मिनट तक करें |
* नारियल का पानी रोगी की स्थिति के अनुसार मात्रा में नियमित दे |
* आंवला, हर्र, बहेड़ा, तीनो को बराबर मात्रा में पीस कर इसको पानी में उबाल कर फिर पानी छान कर पी लें |
* नीबू पानी दिन में दो बार पिये |
* टमाटर का जूस, गाजर का जूस, चुकंदर का जूस, सेव का और मौसमी का जूस इनका सेवन करे |
* कद्दू या सीता फल के बीज को निकाल कर पेड़ के नीचे सुखा लें फिर पीस कर बारीक चूर्ण बना लें और सुबह शाम सेवन करें |
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