माइग्रेन (आधासीसी दर्द ) Migraine -
माइग्रेन का दर्द तेजी से बढता हुआ एक रोग है आयुर्वेद के अनुसार रूखा भोजन, बार - बार भोजन करना, दही, वर्फ आदि ठन्डे पदार्थो का रात में सेवन करना, मल मूत्र के वेग को रोकना, बहुत काम करने, अधिक कसरत करने से,कच्ची नींद में जागना, नींद पूरी न लेना, कम रोशनी में पढना, अधिक समय तक कंप्यूटर पर काम करना, पानी कम पीना इत्यादि इसके मुख्य कारण होते है |
25% लोगो में ये त्रिदोष के कारण होता है वैसे ये एक वायु की प्रधानता से होने वाला रोग है कभी - कभी ये कफ के कुपित होने से भी होता है |
इसलिए किस दोष के कारण ये हुआ है इसे जानकर इसकी सफल चिकित्सा सम्भव है |
लक्षण (Symptoms) और आयुर्वेदिक उपचार (Ayurvedic treatment)-
किस कारण से माइग्रेन हुआ है इसके वारे में जान लेना सबसे जरुरी है |
बहुत से लोगो को में दोपहर का खाना जल्दी खाना या देर से खाने पर या भीड़ भरी जगह पर जाने से माइग्रेन का pain होने लगता है |
इस तरह के दर्द में त्रिफला का चूर्ण 1 चम्मच सुबह खाली पेट गुनगुने पानी के साथ ले तथा रात के भोजन में दलिया या मूंग की दाल की खिचड़ी बनाकर उसमे गाय का देशी घी डालकर उसका सेवन करे तथा रात को खाना खाने के बाद मुलेठी का चूर्ण गर्म पानी से लें |
यदि सुबह - सुबह उठने पर दर्द के लक्षण दिखाई दे तो त्रिफला, चिरायता, नीम की छाल,गिलोय इन सभी को पीस कर तथा 20 ग्राम चूर्ण लेकर उसे 200 ग्राम पानी में डाल कर काडा बना ले फिर उसमें काला नमक, गुड डाल लें और इसे सुबह जल्दी खाली पेट और रात को सोने से पहले लें
यदि सिरदर्द के साथ यदि रोगी को जुकाम हो या पुराना क्षय रोग हो तो रोगी को सितोपलादि चूर्ण के साथ गोदंती भस्म और गिलोय सत्व शहद के साथ सुबह शाम लें |
महिलायों में ये शिकायत माहवारी के समय भी होती है उसके लिए महिलाओ को रज प्रवर्तनी वती का सेवन करें महीना आने से 5 दिन पहले से इसका सेवन करें |
लयूकोरिया के कारण भी महिलाओ में माइग्रेन की शिकायत हो सकती है इसके लिए अशोकरिस्ठ और चन्द्रप्रभावटी का सेवन उपयोगी है |
आँखों में कमजोरी के कारण भी ये दर्द बनता है इसके लिए आँखों की कमजोरी को दूर करने की चिकित्सा लें|
माइग्रेन का दर्द तेजी से बढता हुआ एक रोग है आयुर्वेद के अनुसार रूखा भोजन, बार - बार भोजन करना, दही, वर्फ आदि ठन्डे पदार्थो का रात में सेवन करना, मल मूत्र के वेग को रोकना, बहुत काम करने, अधिक कसरत करने से,कच्ची नींद में जागना, नींद पूरी न लेना, कम रोशनी में पढना, अधिक समय तक कंप्यूटर पर काम करना, पानी कम पीना इत्यादि इसके मुख्य कारण होते है |
25% लोगो में ये त्रिदोष के कारण होता है वैसे ये एक वायु की प्रधानता से होने वाला रोग है कभी - कभी ये कफ के कुपित होने से भी होता है |
इसलिए किस दोष के कारण ये हुआ है इसे जानकर इसकी सफल चिकित्सा सम्भव है |
लक्षण (Symptoms) और आयुर्वेदिक उपचार (Ayurvedic treatment)-
किस कारण से माइग्रेन हुआ है इसके वारे में जान लेना सबसे जरुरी है |
बहुत से लोगो को में दोपहर का खाना जल्दी खाना या देर से खाने पर या भीड़ भरी जगह पर जाने से माइग्रेन का pain होने लगता है |
इस तरह के दर्द में त्रिफला का चूर्ण 1 चम्मच सुबह खाली पेट गुनगुने पानी के साथ ले तथा रात के भोजन में दलिया या मूंग की दाल की खिचड़ी बनाकर उसमे गाय का देशी घी डालकर उसका सेवन करे तथा रात को खाना खाने के बाद मुलेठी का चूर्ण गर्म पानी से लें |
यदि सुबह - सुबह उठने पर दर्द के लक्षण दिखाई दे तो त्रिफला, चिरायता, नीम की छाल,गिलोय इन सभी को पीस कर तथा 20 ग्राम चूर्ण लेकर उसे 200 ग्राम पानी में डाल कर काडा बना ले फिर उसमें काला नमक, गुड डाल लें और इसे सुबह जल्दी खाली पेट और रात को सोने से पहले लें
यदि सिरदर्द के साथ यदि रोगी को जुकाम हो या पुराना क्षय रोग हो तो रोगी को सितोपलादि चूर्ण के साथ गोदंती भस्म और गिलोय सत्व शहद के साथ सुबह शाम लें |
महिलायों में ये शिकायत माहवारी के समय भी होती है उसके लिए महिलाओ को रज प्रवर्तनी वती का सेवन करें महीना आने से 5 दिन पहले से इसका सेवन करें |
लयूकोरिया के कारण भी महिलाओ में माइग्रेन की शिकायत हो सकती है इसके लिए अशोकरिस्ठ और चन्द्रप्रभावटी का सेवन उपयोगी है |
आँखों में कमजोरी के कारण भी ये दर्द बनता है इसके लिए आँखों की कमजोरी को दूर करने की चिकित्सा लें|
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ReplyDeletebalo ke liye tips in hindi