जुखाम या सर्दी (ayurvedic treatment of cold) का उपचार -
जुखाम बार बार होना एक आक्रांत बीमारी है जो बहुत से मनुष्यों में पायी जाती है|
जुखाम कई बड़ी बीमारियों का कारण होता है यदि समय पर सर्दी जुखाम का इलाज न हो तो स्नोफिलिया, अस्थमा, साइनस, फेफड़ो में इन्फेक्शन, माइग्रेन सर दर्द इत्यादि बीमारियों का कारण बनता है |
कारण(CAUSE)-
जुखाम होने का सबसे बड़ा कारण कफ का कुपित होना है इसके अलावा आज कल दूषित वायु (air pollution) की वजह से भी ये रोग लगता है |अनियमित खान पान , अनियंत्रित खान पान ,दूषित पानी पीना, तेज धूप या गर्मी में ठंडा पानी पीना, मल का वेग रोकना, अनियमित दिनचर्या इत्यादि इसके मुख्य कारण होते है |
इस रोग की बजह से रक्त (blood) में इन्फेक्शन हो जाता है यदि लगातार सर्दी जुखाम बना रहता है तो स्नोफिलिया, फेफड़ो में इन्फेक्शन, अस्थमा आदि रोग हो सकते है केवल आयुर्वेद में इसका स्थायी इलाज सम्भब है
उपचार ( treatment) -
रसमाणिक्य 2 ग्राम, महालक्ष्मीविलास 5 ग्राम, अभ्रक भस्म सहस्त्रपूटित 2 ग्राम, लधुबसंतमालती 5 ग्राम, बृहतशिंगारा 10 ग्राम, प्रबाल पुष्टि 10 ग्राम, ताली सादी चूर्ण 50 ग्राम ,पुष्कर मूल चूर्ण 50 ग्राम ,अब इन सभी को मिलाकर कूट पीस लें और 40 पूडिया बराबर - बराबर की बना ले और सुबह शाम एक-एक पूडिया शहद के साथ लें |
दस्मूलारिस्ट, द्राछारिस्ट दो - दो चम्मच दोगुना जल मिलाकर खाना खाने के बाद लें |
सितोफिला चूर्ण को शहद से दिन में तीन बार लें |
अदरक के रस को शहद के तथा पुराने गुड के साथ दिन में तीन बार लें |
नोट - जंक फ़ूड, ना खाये ,खट्टा, अधिक मीठा, कोल्ड ड्रिंक, ठंडा पानी, इन सभी से परहेज रखें |
जुखाम बार बार होना एक आक्रांत बीमारी है जो बहुत से मनुष्यों में पायी जाती है|
जुखाम कई बड़ी बीमारियों का कारण होता है यदि समय पर सर्दी जुखाम का इलाज न हो तो स्नोफिलिया, अस्थमा, साइनस, फेफड़ो में इन्फेक्शन, माइग्रेन सर दर्द इत्यादि बीमारियों का कारण बनता है |
कारण(CAUSE)-
जुखाम होने का सबसे बड़ा कारण कफ का कुपित होना है इसके अलावा आज कल दूषित वायु (air pollution) की वजह से भी ये रोग लगता है |अनियमित खान पान , अनियंत्रित खान पान ,दूषित पानी पीना, तेज धूप या गर्मी में ठंडा पानी पीना, मल का वेग रोकना, अनियमित दिनचर्या इत्यादि इसके मुख्य कारण होते है |
इस रोग की बजह से रक्त (blood) में इन्फेक्शन हो जाता है यदि लगातार सर्दी जुखाम बना रहता है तो स्नोफिलिया, फेफड़ो में इन्फेक्शन, अस्थमा आदि रोग हो सकते है केवल आयुर्वेद में इसका स्थायी इलाज सम्भब है
उपचार ( treatment) -
रसमाणिक्य 2 ग्राम, महालक्ष्मीविलास 5 ग्राम, अभ्रक भस्म सहस्त्रपूटित 2 ग्राम, लधुबसंतमालती 5 ग्राम, बृहतशिंगारा 10 ग्राम, प्रबाल पुष्टि 10 ग्राम, ताली सादी चूर्ण 50 ग्राम ,पुष्कर मूल चूर्ण 50 ग्राम ,अब इन सभी को मिलाकर कूट पीस लें और 40 पूडिया बराबर - बराबर की बना ले और सुबह शाम एक-एक पूडिया शहद के साथ लें |
दस्मूलारिस्ट, द्राछारिस्ट दो - दो चम्मच दोगुना जल मिलाकर खाना खाने के बाद लें |
सितोफिला चूर्ण को शहद से दिन में तीन बार लें |
अदरक के रस को शहद के तथा पुराने गुड के साथ दिन में तीन बार लें |
नोट - जंक फ़ूड, ना खाये ,खट्टा, अधिक मीठा, कोल्ड ड्रिंक, ठंडा पानी, इन सभी से परहेज रखें |
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