स्तनों में कर्क रोग (Breast Cancer) होना आज के समय में एक आम बात होती जा रही है हमारे देश में हर 8 महिलाओ में से 1 को ब्रैस्ट कैंसर या स्तनों का कर्क रोग पाया जा रहा है तो आईये जानते हैं महिलाओं के स्तनों का कर्क रोग लक्षण और उपचार - Breast Cancer in Women's - Symptoms and Treatment

महिलाओं के स्तनों का कर्क रोग लक्षण और उपचार ( Breast Cancer in Women's - Symptoms and Treatment

महिलाओं के स्तनों का कर्क रोग लक्षण और उपचार ( Breast Cancer in Women's - Symptoms and Treatment in Hindi

जैसा की हम पहले भी बताते आये है वात, पित्त, कफ, के बिगड़ने के कारण ही हमारा शरीर में कोई भी रोग उत्पन्न होता है | मानव शरीर की संरचना में हज़ारो कोशिकाये (cells ) रोज बनती है और नष्ट होती है जब इन कोशिकाओ का विभाजन अनियंत्रित हो जाता है तब ये रोग कैंसर कहलाता है cells में mutation की क्रिया होने पर जब cells में अनियंत्रित विभाजन होता है तो ये cells एकत्र होकर गाँठ का रूप ले लेती है ये गाँठ दो प्रकार की हो सकती है -
  • एक गाँठ तो बनने के बाद उसकी बढ़ना बंद हो जाता है और एक जो बढ़ना बंद ही नहीं होती है
कर्क रोग (Cancer) होने का मुख्य कारण पित्त का बिगड़ना होता है पित्त की नेचर गर्म होती है और जब ये अनियंत्रित होता है तो ये शरीर के आन्तरिक तापमान को बढ़ता (increase) करता है और ये हमारी कोशिकाओ यानि की cells को नुकसान पहुचता है 

ब्रैस्ट केंसर होने के कारण (reason of breast cancer) -

आज कल के परिवेश में सबसे जरुरी तथ्य है खान पान का बिगड़ना, समय से न खाना, खाने में अपाच्य चीजो का अत्यधिक इस्तेमाल करना,  माँ बनने के बाद बच्चे को दूध न पिलाना, तम्बाकू और शराब जैसे नशीले पदार्थो का सेवन करना,  अत्यधिक नींद लेना, जंक फ़ूड कोल्ड ड्रिंक्स जैसे खाध्य और पेय पदार्थो का सेवन करना  जिसकी बजह से हमारे पित्त बिगड़ना शुरू हो जाता है और पित्त दोष केंसर का कारक  होता है - 

ब्रैस्ट कैंसर के लक्षण( Symptoms of breast cancer)

  • स्तन में भारीपन के साथ गाठ की अनुभूति होना
  • स्तन में लालपन का होना 
  • निपलो से दूध के आलावा किसी अन्य  द्रव का स्राव  होना 
  • स्तन में चटके के साथ दर्द होना प्रमुख लक्षण है
  • निपलो और स्तन के आकार में बदलाव आना
  • निपलो से खून का निकलना

ब्रैस्ट कैंसर का उपचार: (Treatment of breast cancer)- 

वैसे तो एलोपेथी में इसके उपचार के लिए किमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी और हर्मोने थेरेपी से इसका इलाज़ संभव है किन्तु इन विधियो से शारीरिक रूप से हमें  काफी नुकसान पहुचता है , आयुर्वेद में इसके इलाज का अचूक उपाय है -
  • एक चमच्च अलसी के बीज को एक ग्लास  पानी में डालकर उबाले जब पानी आधा रह जाये तो उसे कपडे  से छानकर नित्य  सुबह शाम खाना खाने से पहले ले
  • गेहू को किसी खाली जगह या गमले में  डालकर सीचे जब उसकी बाल निकलने लगे और वो लगभग ६ इंच की हो जाये तब उसे काटकर उसे सिलवटे पर पीसकर चटनी बनाले अब उसे सूती कपडे से ताजा पानी से निथार कर उसका जूस बना ले और सुबह खाली पेट ले यह याद रखे यह जूस तुरंत बना कर तुरंत पीना है रखना नहीं है, यह उपाय ब्लड कैंसर के लिए भी लाभदायक है


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