हाइपरटेंशन के बारे में सभी ने सुना होगा जब भी किसी डॉक्टर के पास जाते है तो अधिकतर हमें सुनने को मिलता है की आपकी इस बीमारी का कारण हाइपरटेंशन है, ब्लड प्रेशर, शुगर, किडनी, मोटापा, इत्यादि रोगों की शुरुवात  हाइपरटेंशन से ही होती है इसके होने का केवल एक ही कारण है वात दोष अर्थात जब हमारी वात बिगड़ जाती है और वो शिरोगत यानी दिमाग की ओर बढ़ जाती है तो इस स्थति में हमारी पियूष ग्रंथि (pituitary gland) के दबाब के कारण adrenal glands से cortisol नाम का हॉर्मोन अधिक मात्रा में निकलना शुरू हो जाता है और हम हाइपरटेंशन का शिकार बन जाते है 

कारण-

इसका सबसे बड़ा कारण शरीर में वायु की अधिकता है और शरीर में वायु बनने के कारण समय पर न उठना अर्थात देर तक सोना, समय पर मल त्याग न करना, व्यायाम कम करना, समय पर विश्राम न करना, अधिक शोक, अधिक मानसिक चिंता और स्त्रियों में मासिक घर्म का बंद हो जाना, आरामदायक जीवन यापन इत्यादि वायु को कुपित करने के विशेष कारण है 

समाधान -

  • वैसे तो ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने के बहुत से घरेलु उपचार है किन्तु वायु को यदि कुपित होने से रोकना है तो सर्वप्रथम कायिक रूप से मानसिक रूप से ब्रह्मचर्य का पालन करेंं 
  • नित्य सुबह टहलने जाए, नित्य तिल का तेल लगाकर उसके बाद गुनगुने पानी से स्नान करेंं, रोज सूर्यास्‍त से पहले भोजन करलेंं और सोने से पहले साहित्य पड़ने आदत डालेंं ताकि मन शांत रहे 
  • इसके अलावा आयुर्वेद के कुछ उपाय भी है जैसे की पहले रोगी का स्नेहन करायेंं जिसके लिए बादाम का तेल को कच्चे दूध में मिलाकर उपयोग करे फिर रोगी का स्वेदन गर्म पानी से कराये और सर्पगंधा का सेवन करे तथा नियमित रूप से लहसुन खाने से भी वायु शांत रहती है और रक्त चाप कण्ट्रोल में रहता है 
  • रोज सुबह खाली पेट गिलोय का जूस और ग्वारपाठा ( Aloe vera ) का जूस 15-15 ml मिलाकर नित्य लेंं अवश्य लाभ मिलेगा, स्वर्ण भस्म, चांदी की भस्म, चंद्रभागा, जठामासी, शंखपुष्पी, अर्जुन त्वक इत्यादि औषधी बहुत लाभदायक है 
  • किन्तु इस समस्या से बचने के लिए किसी कुशल वैद् द्वारा सही तरीके से आयुर्वेदिक इलाज कराकर इससे छुटकारा पाया जा सकता है


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